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बढ़ते बच्चों में मोटापा: एक समस्या (Badhte Bacchon Mein Motapa: Ek Samasya)

बढ़ते बच्चों में मोटापा (badhte bacchon mein motapa)

आज के दौर में बढ़ते बच्चों में मोटापा (obesity) माता-पिता के लिए परेशानी का कारण बन गया है। बच्चों का बचपन इस भयंकर बीमारी की चपेट में लगातार आता जा रहा है। हमारे आस-पास हर रोज़ हम न जाने ऐसे कितने ही बच्चों को देखते हैं जो इस बीमारी से ग्रसित हैं। पैरेंट्स स्कूल यूनिफॉर्म लेते समय प्लस साइज की डिमांड करते हैं। अक्सर देखा गया है कि ऐसे बच्चे धीरे-धीरे हीनभावना के शिकार हो जाते हैं। ये बच्चे खेलों में भी रूचि नहीं ले पाते। इनके सहपाठी इन्हें मोटा कह कर चिढ़ाते हैं। यद्यपि ऐसा करना सरासर ग़लत है लेकिन फिर भी ऐसा होता है क्योंकि बच्चे तो आखिर बच्चे होते हैं।
इस आर्टिकल में यह समझाने की कोशिश की गई है कि मोटापा क्या है, इसके कारण क्या हैं, बच्चों में इससे कौन-कौन सी समस्याएं एवं बीमारियां हो सकती हैं, ऐसे में पैरंट्स की क्या जिम्मेदारी है और उन्हें इस भयानक समस्या को रोकने के लिए क्या करना चाहिए?

मोटापा क्या है:
बढ़ते बच्चों में मोटापा अत्यधिक वसा/चर्बी (fats) की वजह से शरीर में आने वाला वह बदलाव है जिससे शरीर का वजन अत्यधिक बढ़ जाता है। साधारण शब्दों में शरीर का वजन जरूरत से ज्यादा बढ़ जाने को ही मोटापा कहते हैं। विश्व भर में यह समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और अपने साथ-साथ शरीर में दूसरी बीमारियों को भी न्योता दे रही है।
वर्ल्ड हैल्थ औरगेनाइजेशन (world health organisation) के आंकड़ों के अनुसार 1975 से लेकर 2016 तक मोटापे की संख्या में तीन गुणा वृद्धि हुई है।

बच्चों में मोटापा होने के कारण:
बढ़ते बच्चों में मोटापा होने के कई कारण हो सकते हैं जिनमें से कुछ का यहां व्याख्यान किया गया है:
1) खान-पान का ग़लत तरीका
2) आधुनिक जीवन शैली
3 ) कोल्डड्रिंक्स का अधिक सेवन
4) मानसिक तनाव
5) व्यायाम न करना
6) अनुवांशिक कारण
7) ज्यादा देर तक बैठे रहना 

1) खान-पान का ग़लत तरीका:
बढ़ते बच्चों में मोटापा बढ़ने का मुख्य कारण उनके खान-पान का ग़लत तरीका है। कंपिटीशन (competition) के इस दौर में रात-रात भर बैठकर पढ़ाई करना बच्चों की आदत बन चुकी है। पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे कुछ ऐसा खाते रहते हैं जो इज़ी टू ईट (easy to eat) हो जैसे नमकीन, बिस्किट, चिप्स, समोसे, कुरकुरे और न जाने कितनी तरह की oily चीज़ें। इन सब  की वजह से शरीर में मोटापा बढ़ता जाता है और उनका शरीर थुलथुल/बेडौल (unsympathetic) बन जाता है। बच्चों में मोटापे की इस समस्या को बढ़ाने में सोशल मीडिया भी जबरदस्त रोल प्ले करता है। सस्ती व मोटापा बढ़ाने वाली खाने की चीजों का खूबसूरत तरीके से प्रचार करते हैं, बच्चे इनकी तरफ आकर्षित हो जाते हैं और खुलकर खाने में इनका इस्तेमाल करते हैं। 

2) आधुनिक जीवन शैली:
आजकल के व्यस्त जीवन में जब पैरंट्स दोनों वर्किंग हों उनके पास इतना समय नहीं होता कि अपनी देखरेख में बच्चों को हर रोज़ पौष्टिक खाना खिलाएं और उनके टेस्ट (taste) का भी ध्यान रखें, यही कारण है कि बच्चे बिना किसी चीज की परवाह किए फ़ास्ट फ़ूड जैसे पिज्जा, बर्गर, मैगी, केक इत्यादि की तरफ़ आकर्षित होते जा रहे हैं इन खानों में हाई कैलोरी होने की वजह से बच्चों का वजन जरूरत से ज्यादा बढ़ रहा है। माता-पिता को चाहिए कि अपनी व्यस्त जीवन शैली से थोड़ा समय निकाल कर बच्चों की तरफ ध्यान दें और उनकी पौष्टिकता का पूरा ध्यान रखें।

3) कोल्डड्रिंक्स का अधिक सेवन:
कोल्डड्रिंक्स का नाम सुनते ही हर बच्चे का चेहरा खिल उठता है वे इनका भरपूर मात्रा में प्रयोग कर रहे हैं बिना यह जाने कि उनके शरीर के लिए यह इन द लौंग रन कितने घातक साबित हो सकते है। कोल्डड्रिंक्स के लगातार सेवन से इसमें पाए जाने वाले फास्फोरस एसिड की वजह से हंडियां कमजोर होना शुरू हो जाती हैं।  इनमें शुगर की मात्रा भी ज्यादा होती है। अधिक मात्रा में सेवन करने से बच्चों का वज़न तेजी से बढ़ना शुरू हो जाता है। अतः बच्चों को चाहिए कि अगर वज़न कम करना चाहते हैं तो कोल्डड्रिंक्स के अधिक सेवन से दूर रहें।

4) मानसिक तनाव:
मानसिक तनाव बच्चों में मोटापा बढ़ने का एक और बड़ा कारण है। आजकल बच्चों में कंपीटिशन इतना ज्यादा बढ़ गया है कि किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए अधिक से अधिक मार्क्स (marks) लाने की होड़ में बच्चे हमेशा तनाव में रहने लगे हैं, बच्चों का यही मानसिक तनाव पैरंट्स की चिंता का विषय बना हुआ है। स्कूल-टीचर्स (school teachers) और पैरंट्स मिलकर बच्चों को इस समस्या से बाहर निकाल सकते हैं उन्हें मार्क्स (marks) लाने का स्ट्रैस न देकर स्किल डेवलपमेंट (skil development) के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए जैसे कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी देश को संबोधित करते हुए मन की बात में बार-बार आत्मनिर्भर बनने के लिए स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रेरित करते हैं।

5) व्यायाम न करना:
बच्चे घरों में टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर इत्यादि पर इतने बिज़ी (busy) हो जाते हैं कि खेलने के लिए उन्हें बाहर जाना भी अच्छा नहीं लगता। माता-पिता उनके सामने खाने की चीजें परोसते रहते हैं। फिज़िकल एक्टिविटी न होने की वजह से लगातार उनका वजन बढ़ता जाता है। पैरंट्स को चाहिए कि बच्चों को आउट डोर एक्टिविटी (outdoor activities) जैसे फुटबॉल, बास्केटबॉल, रनिंग, स्किपिंग, टैनिस इत्यादि खेलने के लिए प्रोत्साहित करें, योगा करवाएं और हां व्यायाम न करने से होने वाले नुक़सान से भी अवगत कराएं।

6) अनुवांशिक कारण:
अक्सर माना गया है कि परिवार में मोटापा यदि  कई पीढ़ियों से चला आ रहा है तो बच्चों में भी मोटापा आने की संभावना बढ़ जाती है। अनुवांशिक कारण से होने वाले मोटापे की समस्या को काफी हद तक लाइफ स्टाइल में तब्दीली ला कर रोका जा सकता है।

7) ज्यादा देर तक बैठे रहना:
 बच्चों की गतिविधियों में इतना ठहराव आ गया है कि छोटी-छोटी चीजों के लिए या छोटे-मोटे कार्यों के लिए उन्हें इधर-उधर भागदौड़ नहीं करनी पड़ती। उदाहरण के लिए बाहर जाकर खेलने की जगह मोबाइल व कंप्यूटर गेम्स ने ले ली, किचन में खड़े हो कर खाना बनाने की जगह आॉन लाइन आॉडर ने ले ली। कहने का तात्पर्य है ज्यादा देर तक बैठे रहना भी एक कारण बन गया है बच्चों में लगातार बढ़ रहे मोटापे का। पैरंट्स को चाहिए कि बच्चों को उनके छोटे-छोटे काम उन्हें स्वयं करने दें, माॉर्निंग वाॉक, ऐक्सरसाइज, योगा इत्यादि के लिए भी प्रेरित करें।

मोटापे से होने वाली समस्याएं:
दुनिया भर के बढ़ते बच्चों में मोटापा एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। मोटापे से ग्रसित बच्चे कई प्रकार की समस्याओं से जूझ रहे हैं जैसे:
  • बच्चे तनाव का शिकार होते जा रहे हैं।
  • डिप्रेशन में जाने का खतरा बढ़ जाता है।
  • बच्चे मानसिक एवं शारीरिक रूप से कमज़ोर महसूस करते हैं।
  • सैल्फ काॅनफिडैंस में कमी आ रही है।
  • दूसरे बच्चों के साथ खेलने-कूदने से कतराते हैं।
  • किसी काम में मन नहीं लगता हमेशा थकावट महसूस करते हैं।
  • स्कूल में एक्सट्रा करिकुलम एक्टिविटीस (extra curriculum activities) में पार्टिसिपेट करने से घबराते हैं।
  •  कई प्रकार की बीमारियों से घिर जाते हैं जैसे शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग, आर्थराइटिस, किडनी, लिवर इत्यादि।
  • फीमेल चाइल्ड में अधिक मोटापा बढ़ जाने से हार्मोन्स ठीक से फंक्शन नहीं कर पाते जिसकी वजह से उन्हें अनियमित पीरियड्स की समस्या से जूझना पड़ता है।

पैरंट्स क्या करें:
बढ़ते बच्चों में मोटापा माता-पिता की परेशानी का सबसे बड़ा कारण है। मोटापा बढ़ने से रोकने में पैरंट्स ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं जैसे-
  •  बच्चों की दिनचर्या सैट करें।
  •  हाई कैलोरी से भरपूर खाना घी, मक्खन, तली चीजें, मीठाई, पिज्जा, बर्गर इत्यादि से दूर रखें।
  •  ज्यादा देर तक टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल के सामने न बैठने दें। 
  •  बच्चों को उनके छोटे-छोटे रोज़मर्रा के कार्य स्वयं करने दें।
  •  हर रोज़ बाहर शारीरिक गतिविधियों वाले गेम्स जैसे फुटबॉल, बास्केटबॉल, टैनिस इत्यादि खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।
  •  बच्चों को कभी भी हतोत्साहित न होने दें समय-समय पर उनका हौसला व आत्मविश्वास बढ़ाते रहें।
  •  घर में हमेशा तनाव मुक्त माहौल बनाने की कोशिश करें।
  •  जहां तक हो सके बच्चों को घर में बना पौष्टिकता से भरपूर खाना जिसमें सैलेड, फ्रूट्स, हरी पत्तेदार सब्जियां, एग, (egg) फिश इत्यादि शामिल हों ही खिलाएं और स्वयं भी बच्चों के साथ बैठकर खाएं। समय-समय पर उन्हें खाने की न्युट्रिशियस वैल्यु  (nutritious value) से भी अवगत कराएं।

ध्यान देने योग्य:
बढ़ते बच्चों में निरंतर बढ़ता मोटापा भविष्य में होने वाली अनंत बीमारियों की दस्तक है। इसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ पैरंट्स हैं क्योंकि बच्चे बचपन में पूरी तरह माता-पिता पर निर्भर होते हैं वे जो खिलाते हैं बच्चे वही खाते हैं।  हमारे बच्चे देश की नींव हैं अगर नींव स्ट्रांग (strong)  है तो देश का भविष्य औटोमैटिकली (automatically) उज्जवल होगा। अतः बच्चों की दिनचर्या, पौष्टिक आहार, फिजिकल और मैंटल ग्रोथ के लिए कब और कितना व्यायाम जरूरी है इन सब की जिम्मेदारी पैरंट्स की है। इस के लिए यदि उन्हें बच्चों के साथ सख्ति भी करनी पड़े तो वह सख्ति सराहनीय होगी।

Kids Hindi Author लेखिका: पिंकी राय शर्मा  

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